Wednesday, 19 February 2025

एक वादा था

कुछ लम्हों को चुन के मैंने बुना था तुम्हें…….. जैसे, किसी चित्रकार ने एक केनवास पे अपने प्यार को उतारा हो। इंद्रधनुषि तुम हो तो मेरा प्यार भी संगीत है … कई ज़िंदगी जिया है एक तुम्हें पाके…. जैसे एक वादा था और हक़ीक़त तुम हो … शंकर शाह

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